
नई दिल्ली | BREAKING NEWS : भारतीय प्रीमियर लीग (IPL) जहां क्रिकेट प्रेमियों के लिए उत्साह और मनोरंजन का प्रमुख स्रोत है, वहीं यह भारत के बैंकिंग सिस्टम के लिए एक तकनीकी परीक्षा की घड़ी बन गई है। इस टूर्नामेंट के दौरान वैध और अवैध सट्टेबाज़ी गतिविधियों में भारी उछाल देखा जाता है, जिससे बैंकों के आईटी ढांचे पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
BREAKING NEWS रिपोर्ट के मुताबिक, IPL के हर सीजन में भारत में करीब 100 अरब डॉलर (लगभग 8.3 लाख करोड़ रुपये) की गैरकानूनी बेटिंग होती है। ये गतिविधियाँ आमतौर पर विदेशी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से संचालित होती हैं, जहां भारतीय यूज़र्स क्रिप्टोकरेंसी और म्यूल अकाउंट्स के ज़रिए लेन-देन करते हैं।
इसके साथ ही, Dream11 और Probo जैसे वैध फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म्स भी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं, जहां असली पैसे से मैच आधारित भविष्यवाणियाँ की जाती हैं। इस वजह से बैंकों को UPI नेटवर्क के ज़रिए सुरक्षित और त्वरित ट्रांजैक्शन की सुविधा सुनिश्चित करनी होती है।
READ MORE : Snake Bite Death News : क्या ये बदला था? युवक को सांप ने 10 बार डंसा, फिर शव के पास पूरी रात…
BREAKING NEWS भारत का UPI प्लेटफॉर्म आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जो हर साल करीब 3 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 250 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के ट्रांजैक्शनों को संभालता है। IPL के दौरान ट्रांजैक्शनों की संख्या में जबरदस्त उछाल आता है, जिससे सर्वर पर बोझ बढ़ जाता है और फेल्योर रेट में भी वृद्धि देखी जाती है।
NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) हर महीने बैंकों के फेल्योर रेट की रिपोर्ट जारी करता है, जिससे ग्राहक यह तय कर सकें कि उनका पैसा किस बैंक में सबसे सुरक्षित रहेगा। BREAKING NEWS
BREAKING NEWS भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकों की डिजिटल कार्यक्षमता और साइबर सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इस संदर्भ में, बैंक अब बिग डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एनालिटिक्स कंपनियों का सहयोग ले रहे हैं। बेंगलुरु स्थित VuNet Systems जैसे स्टार्टअप्स हर दिन लगभग 1 अरब ट्रांजैक्शन की निगरानी करते हैं और रोजाना करीब 50 टेराबाइट डेटा का प्रोसेसिंग करते हैं।